(देवी शीतला माता को समर्पित पावन पर्व)

शीतला माता मंत्र:
शीतले शीतलां देवीं, रासभस्थां दिगंबराम्।
मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम्॥
शीतलामार्चयेन्नित्यं सर्वरोगनिवारिणीम्॥
शीतला सातम एक पारंपरिक हिन्दू पर्व है, जिसे मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आस-पास के क्षेत्रों में स्त्रियाँ श्रद्धा से मनाती हैं। यह पर्व माता शीतला के चरणों में समर्पित होता है, जो बीमारियों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं।
🌼 शीतला सातम मनाने का कारण:
🛡️ 1. बीमारियों से रक्षा की देवी
शीतला माता को विशेष रूप से चेचक (smallpox), खसरा, त्वचा रोग आदि से बचाने वाली देवी माना जाता है।
🙏 मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर बच्चों और परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है।
🍽️ 2. ठंडा भोजन खाने की परंपरा
इस दिन महिलाएं एक दिन पहले बना खाना (बासी भोजन) ही खाती हैं, जिसे “शीतल भोजन” कहा जाता है।
यह दर्शाता है कि शीतलता और संतुलन से रोगों से बचाव होता है, और शरीर में शुद्धता आती है।
🌦️ 3. ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य का ध्यान
शीतला सातम गर्मी की शुरुआत या मानसून से पहले आता है — जब संक्रमण फैलने की संभावना रहती है।
इस समय देवी की आराधना से माना जाता है कि घर पर बीमारियों का असर नहीं होता।
🕊️ 4. धार्मिक आस्था और लोक परंपरा
लोक मान्यताओं के अनुसार यदि शीतला माता प्रसन्न होती हैं, तो घर में वर्षभर स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
स्त्रियाँ विशेष रूप से अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए यह व्रत करती हैं।
📿 शीतला सातम के दिन महिलाएं क्या करती हैं?
- एक दिन पहले ही पूरा भोजन बना लेती हैं।
- अगली सुबह स्नान कर देवी शीतला की पूजा करती हैं।
- मंदिर जाकर बासी पूड़ी, चावल, दही, और ठंडा भोजन देवी को अर्पित करती हैं।
- फिर वही भोजन प्रसाद रूप में स्वयं और परिवार द्वारा ग्रहण किया जाता है।
मैं आपको कल शीतला माता की वास्तविक कहानी लिखकर भेजूंगा।
- मुझे इतना प्यार देने के लिए आप सभी का दिल से धन्यवाद।
- आपका साथ और स्नेह मेरे लिए बहुत खास है।