
महल की पहली झलक
चारों ओर ऊँचे, जले हुए पेड़… और धुंध।
बीच में खड़ा है – एक पुराना, टूटा-फूटा लेकिन बेहद विशाल महल।
दरवाजे पर एक चिह्न बना है –
के चारों ओर रक्त से बनी तांत्रिक रेखाएं।
नीहा (डरी हुई):
“ये… महल जंगल के बीच में क्या कर रहा है?”
Rahul: “कोई टास्क का हिस्सा होगा?”
Vicky: “या कोई और जाल…”
Veer धीरे से मुस्कराता है।
Part 8 – रहस्यमयी महल की ओर
स्थान: जंगल के भीतर एक छिपा हुआ रास्ता
समय: तीसरे दिन की रात
तीन दिन बीत चुके थे। जंगल में हो रही अजीब घटनाएं — गायब होते दोस्त, रात में सुनाई देने वाली असामान्य आवाज़ें, और हर टास्क के बाद गहराता डर — अब सभी को मानसिक रूप से तोड़ रहा था।
रात के अंधेरे में, जब सब थक कर बैठे थे,
Veer अचानक बोला:
Veer (धीरे से):
“मेरे साथ चलो… मैं एक जगह जानता हूँ… जहाँ शायद जवाब मिल सकते हैं।”
Rahul: “कहाँ?”
Veer: “बस… चुपचाप मेरे पीछे चलो। वहाँ जो मिलेगा, वो तुम्हें खुद सब समझा देगा।”
बिना ज़्यादा सवाल किए, सब उसके पीछे चल पड़ते हैं।
जंगल का रहस्यमयी रास्ता
Veer सबको एक पतली पगडंडी से घने जंगल के बीचों-बीच लेकर जाता है।
जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते हैं, वातावरण बदलने लगता है —
धुंध गहरी होती जाती है, पत्तियों की सरसराहट रहस्यमयी सी लगती है, और पेड़ पुराने, जले हुए प्रतीत होते हैं।
तभी, एक मोड़ पर…
सामने अचानक एक विशाल परित्यक्त महल दिखाई देता है।
उँची दीवारें, टूटी हुई छत, लेकिन अब भी ऐसा लगता था कि वहां कोई मौजूद है।
Pragya (धीरे से):
“ये क्या जगह है…?”
Sonal: “कोई बहुत पुराना किला लगता है।”
Vicky: “क्या ये कोई टास्क का हिस्सा है?”
Veer कुछ नहीं बोलता।
बस आगे बढ़ता है… और सब उसका पीछा करते हैं।
महल के अंदर प्रवेश
दरवाजे अपने आप खुलते हैं… एक ठंडी हवा अंदर से बाहर आती है।
भीतर प्रवेश करते ही दीवारों पर जले हुए दीपक जल उठते हैं — जैसे किसी ने उन्हें आने का इंतज़ार किया हो।
सबके चेहरे पर डर और हैरानी —
महल के अंदर चारों तरफ तांत्रिक चिह्न, मंत्र लिखे हुए, और एक विशाल पूजा स्थल।
पर वहां कोई इंसान नहीं…
Neha (फुसफुसाते हुए):
“ये जगह मुझे ठीक नहीं लग रही…”
Mayank: “Veer… कुछ तो बताओ, ये सब क्या है?”
Veer चुप रहता है। उसकी आंखें दीवारों पर टिक गई हैं।
शायद वो कुछ पहचान रहा है… या याद कर रहा है।
Rahul: “Veer! बात क्यों नहीं कर रहा?”
Veer (धीरे से):
“बस यहीं रुको… अभी सब पता चल जाएगा…”
Part 9 – रहस्य की किताब और जागती शक्ति
स्थान: महल का हॉल और बाकी परिसर
समय: रात – महल में प्रवेश के बाद
दरवाजे अपने आप बंद हो चुके थे। सभी थोड़ा डरे हुए थे लेकिन थकान और भूख ज़्यादा हावी थी।
Rahul: “Veer… ये क्या जगह है? तुम कुछ जानते हो क्या?”
Veer (थोड़ा झुंझलाकर):
“मुझे क्या पता यार! मुझे लगा शायद यहां कुछ खाने को मिल जाएगा… या कोई रास्ता बाहर जाने का…”
Veer धीरे-धीरे चलकर एक साइड में बनी पुरानी सी किचन की ओर इशारा करता है।
सभी उसके पीछे जाते हैं।
महल की पुरानी रसोई
मिट्टी की दीवारों और पुराने बर्तनों से भरी रसोई में कुछ चीजें अब भी मौजूद थीं।
-
- एक कोने में कुछ फल पड़े थे – अमरूद, बेर जैसे।
-
- एक स्टील की टोकरी में थोड़े मांस के टुकड़े और कुछ अंडे बचे थे।
-
- एक पुराना चूल्हा भी था, और लकड़ियाँ वहीं रखी थीं।
Pragya, Neha और Kriti खाने की तैयारी में लग जाती हैं।
Kriti:
“कम से कम पेट भरने लायक कुछ तो मिल गया…”
महल की खोज शुरू होती है
बाकी के 6 लड़के महल के अलग-अलग हिस्सों की तरफ निकलते हैं।
Mayank और Arjun एक गलियारे से होकर Library Room में जाते हैं।
कमरा धूल से भरा, लेकिन अंदर लकड़ी की बड़ी अलमारी में सैकड़ों पुरानी किताबें।
Mayank (देखते हुए):
“इतनी दूर जंगल में लाइब्रेरी? और ये सब किताबें किसकी?”
तभी ऊपर से एक किताब खुद-ब-खुद गिरती है।
Thudd!
दोनों चौकते हैं।
वो किताब खुल जाती है और उसके अंदर दोनों ओर से दो डरावने नुकीले नाखूनों वाले हाथ बने होते हैं — जैसे किसी ने किसी आत्मा को किताब में बंद कर रखा हो।
Arjun (घबरा कर):
“ये क्या है यार… ये तो कोई शापित किताब लगती है।”
Mayank: “चल, इसको सबको दिखाते हैं।”
Scene: सब हॉल में इकठ्ठा होते हैं
अब सब खाने के लिए हॉल में आ गए हैं।
एक बड़ा सा पत्थर का टेबल और आसपास पत्थर की कुर्सियाँ।
मिट्टी की प्लेटों में खाना परोसा गया है।
सभी बैठ कर खाने लगते हैं।
तभी Mayank और Arjun वो अजीब किताब लेकर आते हैं।
Neha:
“ये कहाँ से लाई?”
Arjun:
“Library से… खुद गिरकर खुली थी… और अंदर ये देखो…”
वे किताब खोलते हैं।
किताब के दोनों ओर वही भयानक नाखूनों वाले हाथ बने होते हैं।
बीच में एक पुरानी, अनजानी भाषा में टाइटल लिखा होता है।
Kriti (पढ़ने की कोशिश करती है):
“ये तो… कोई भाषा भी समझ नहीं आ रही…”
तभी… अचानक किताब से हल्की आवाज़ आती है
जैसे सूंघने जैसी।
सभी चौंक जाते हैं… लेकिन कोई कुछ समझ नहीं पाता।
असल में… रसोई में बना मांस जब से सामने आया,
किताब में बंधी आत्मा की भूख जाग चुकी थी।
Scene: किताब और Veer का जुड़ाव
Veer एक कोने में चुप बैठा होता है।
तभी उसकी नज़र किताब पर पड़ती है।
वो अचानक उठता है… किताब की ओर बढ़ता है…
और किताब के ऊपर उंगली रखते ही उसके मुँह से एक अजीब भाषा निकलने लगती है — जिसे कोई समझ नहीं पाता।
“श्राह-काल-गानम विष्तार अधो-अन्तः जाग्रति…”
किताब खुद-ब-खुद खुलने लगती है…
उसके अंदर की इबारतें चमकने लगती हैं…
और कमरे का तापमान अचानक गिर जाता है।
Neha (डरते हुए):
“Veer… तुम्हें ये भाषा कैसे आती है…?”
Veer (धीरे-धीरे):
“…मुझे नहीं पता… पर ऐसा लग रहा है… जैसे ये… मेरी ही भाषा है…
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यह कहानी मैंने बहुत सोच-समझकर और दिल से लिखी है।
यह आपके हृदय को छू जाएगी — लेकिन इसे पढ़ते रहने के लिए आपको साथ निभाना होगा।
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