शैली: थ्रिलर | एडवेंचर | सस्पेंस
लेखक: Yogesh solanki(डाय्रेक्टर एंन्ड वाईटर कोंन्टक करने के लिये ई-मेईल किजिये.)
Part 1: आख़िरी साल और अनोखा निमंत्रण
स्थान: कॉलेज कैंपस, शाम का समय
कॉलेज का आख़िरी साल चल रहा था। कैंपस के मैदान और कैंटीन में हर ओर बस एक ही चर्चा – “आगे क्या?”
कोई MBA की तैयारी में था, कोई विदेश जाने के सपने देख रहा था, तो कोई सिर्फ़ नौकरी ढूंढने की बात कर रहा था।
प्रिया: “कॉलेज बस खत्म ही तो हो रहा है… शायद ये लास्ट टाइम होगा जब हम सब साथ हैं।”
उसी वक्त कैंटीन के बाहर एक पुरानी लेकिन चमचमाती हुई बस आकर रुकी।
बस के ऊपर एक बड़ा सा बैनर लगा था:
“जंगल में बिताओ 10 दिन, और जीतों ₹10 करोड़!
रोमांच, रहस्य और रिवॉर्ड – अगर हिम्मत है तो खुद को आज़माओ!”
एक रजिस्ट्रेशन नंबर भी नीचे चमक रहा था: 999xxxx999
सब दोस्त एक-दूसरे की ओर देखने लगे…
नीहा: “क्या सच में?”
राघव: “मज़ाक लग रहा है…”
अर्जुन (जोश में): “सोचो तो! 10 दिन जंगल में… और अगर किस्मत साथ दे गई तो 10 करोड़!”
धीरे-धीरे मन बनने लगा। एक आख़िरी साथ बिताने का मौका शायद यही था।
Part 2: रजिस्ट्रेशन और अजीब सवाल
रात को सभी दोस्त हॉस्टल में अलग-अलग कमरों में थे — लेकिन सोच एक जैसी:
“जाएं या नहीं?”
राहुल (ग्रुप कॉल पर): “देखो, हम सब एक आखिरी बार मस्ती करना चाहते हैं ना? ये मौका फिर नहीं मिलेगा।”
सोनल (आईडिया देते हुए): “हम घर पर बोल देंगे कि ये कॉलेज का रिसर्च ट्रिप है।”
सभी राज़ी हो गए।
वेबसाइट खोली गई। रजिस्ट्रेशन फॉर्म साधारण नहीं था।
नाम, उम्र, कॉलेज के अलावा पूछे गए सवाल कुछ ऐसे थे:
-
- किस चीज़ से सबसे ज़्यादा डर लगता है?
अर्जुन: “मतलब हमारी पर्सनल लाइफ से गेम के टास्क जुड़ेंगे?”
मयंक: “शायद कोई रियलिटी शो-टाइप प्लान है।”
“यह सफर आपके जीवन का सबसे अनोखा अनुभव हो सकता है… या अंतिम भी।”
पर कोई ज़्यादा नहीं सोचता। सबने फॉर्म भर दिया।
Part 3: सफर की शुरुआत और छुपे हुए दुश्मन
अगली सुबह – कॉलेज कैंटीन
सभी को एक ही SMS आता है:
“Congratulations! You have been selected for the Jungle Challenge!”
Report at: XYZ Point, Hotel Pash के पास
Time: 3:00 AM Tonight
नीहा: “हम सब सेलेक्ट हो गए?”
आरव: “मतलब पूरा ग्रुप jungle में! What a luck!”
लेकिन तभी…
Scene Cut – कैंटीन का एक कोना
कुछ पुराने दुश्मन – Vicky, Tanya, Kriti, Rohit – भी वहीं होते हैं।
Vicky (धीरे से): “अब Jungle में हिसाब बराबर होगा… गेम तो अब शुरू होगा।”
Part 4: रहस्यमयी बस और नीली रौशनी
रात 2:45 AM – Hotel Pash के पास
अंधेरी सुनसान सड़क।
2:59 बजे एक ब्लैक मिनी बस वहाँ आकर रुकती है।
ड्राइवर बिना कुछ कहे बस की तरफ़ इशारा करता है।
सब दोस्त चढ़ जाते हैं।
बस के अंदर: सिर्फ नीली लाइट्स, कोई आवाज़ नहीं, कोई इंस्ट्रक्शन नहीं।
3:30 बजे अचानक AC वेंट से सफेद गैस निकलने लगती है…
आरव: “ये स्मोक कैसा…”
नीहा: “मेरी आंखें जल रही हैं…”
राहुल: “कुछ गड़बड़ है यार…”
और फिर… सब बेहोश हो जाते हैं।

Part 5: जब आंख खुली, जंगल बोला
सुबह – 7:45 AM
आरव की आंख खुलती है…
सामने – घना जंगल, धुंध, सूरज की किरणें, पंछियों की आवाज़…
बीच में एक गोल घेरे में 20 लोग – सभी दोस्त… और वो पुराने दुश्मन भी।
स्पीकर से आवाज़:
“स्वागत है… आप Jungle Challenge Site पर पहुंच चुके हैं।
हर दिन एक टास्क होगा।
हर टास्क देगा आपको एक hint – 10 करोड़ जीतने का।
लेकिन… जो हारेंगे, वो jungle में खो जाएंगे…”
Part 6: जंगल की पहली चाल
चारों ओर सिर्फ जंगल – बांस, लताएं, डरावनी आवाज़ें…
सोनल (डरते हुए): “ये कहीं शेरों वाला जंगल तो नहीं?”
नीहा: “भूख लग रही है यार… कुछ तो चाहिए…”
राहुल (गंभीर होकर): “अब मज़ाक का समय नहीं है। ये असली है!”
तभी सामने आता है – वीर।
कम बोलने वाला लड़का, पर जंगल की थोड़ी जानकारी रखता है।
वीर: “अगर हमें सर्वाइव करना है, तो चलना होगा। पानी ढूंढना जरूरी है।
पानी हमेशा ढलान में होता है।”
राहुल: “ठीक है, तुम आगे चलो। हम साथ हैं।”
Part 7 – तांत्रिक महल का रहस्य
स्थान: जंगल के एक घने हिस्से के बीच
समय: तीसरे दिन की रात
तीन दिन बीत चुके थे। जंगल में लगातार अजीब घटनाएँ हो रही थीं –
लोग गायब हो रहे थे, टास्क खतरनाक होते जा रहे थे, और माहौल में एक असहज डर गहराता जा रहा था।
Veer (वही शांत लड़का जो पहले भी जंगल में जानकार साबित हुआ था)
एक रात सबको एक रास्ते पर ले जाता है…
Veer:
“मैंने एक जगह देखी है… जो नक्शे में नहीं थी।
बहुत अंदर… लेकिन हो सकता है वहां से बाहर निकलने का कोई रास्ता हो।”
थोड़ा हिचकिचाने के बाद, पूरा ग्रुप उसके पीछे चलता है।

Scene: महल की पहली झलक
चारों ओर ऊँचे, जले हुए पेड़… और धुंध।
बीच में खड़ा है – एक पुराना, टूटा-फूटा लेकिन बेहद विशाल महल।
दरवाजे पर एक चिह्न बना है –
के चारों ओर रक्त से बनी तांत्रिक रेखाएं।
नीहा (डरी हुई):
“ये… महल जंगल के बीच में क्या कर रहा है?”
Rahul: “कोई टास्क का हिस्सा होगा?”
Vicky: “या कोई और जाल…”
Veer धीरे से मुस्कराता है।
Part 8 – रहस्यमयी महल की ओर
स्थान: जंगल के भीतर एक छिपा हुआ रास्ता
समय: तीसरे दिन की रात
तीन दिन बीत चुके थे। जंगल में हो रही अजीब घटनाएं — गायब होते दोस्त, रात में सुनाई देने वाली असामान्य आवाज़ें, और हर टास्क के बाद गहराता डर — अब सभी को मानसिक रूप से तोड़ रहा था।
रात के अंधेरे में, जब सब थक कर बैठे थे,
Veer अचानक बोला:
Veer (धीरे से):
“मेरे साथ चलो… मैं एक जगह जानता हूँ… जहाँ शायद जवाब मिल सकते हैं।”
Rahul: “कहाँ?”
Veer: “बस… चुपचाप मेरे पीछे चलो। वहाँ जो मिलेगा, वो तुम्हें खुद सब समझा देगा।”
बिना ज़्यादा सवाल किए, सब उसके पीछे चल पड़ते हैं।
Scene: जंगल का रहस्यमयी रास्ता
Veer सबको एक पतली पगडंडी से घने जंगल के बीचों-बीच लेकर जाता है।
जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते हैं, वातावरण बदलने लगता है —
धुंध गहरी होती जाती है, पत्तियों की सरसराहट रहस्यमयी सी लगती है, और पेड़ पुराने, जले हुए प्रतीत होते हैं।
तभी, एक मोड़ पर…
सामने अचानक एक विशाल परित्यक्त महल दिखाई देता है।
उँची दीवारें, टूटी हुई छत, लेकिन अब भी ऐसा लगता था कि वहां कोई मौजूद है।
Pragya (धीरे से):
“ये क्या जगह है…?”
Sonal: “कोई बहुत पुराना किला लगता है।”
Vicky: “क्या ये कोई टास्क का हिस्सा है?”
Veer कुछ नहीं बोलता।
बस आगे बढ़ता है… और सब उसका पीछा करते हैं।
Scene: महल के अंदर प्रवेश
दरवाजे अपने आप खुलते हैं… एक ठंडी हवा अंदर से बाहर आती है।
भीतर प्रवेश करते ही दीवारों पर जले हुए दीपक जल उठते हैं — जैसे किसी ने उन्हें आने का इंतज़ार किया हो।
सबके चेहरे पर डर और हैरानी —
महल के अंदर चारों तरफ तांत्रिक चिह्न, मंत्र लिखे हुए, और एक विशाल पूजा स्थल।
पर वहां कोई इंसान नहीं…
Neha (फुसफुसाते हुए):
“ये जगह मुझे ठीक नहीं लग रही…”
Mayank: “Veer… कुछ तो बताओ, ये सब क्या है?”
Veer चुप रहता है। उसकी आंखें दीवारों पर टिक गई हैं।
शायद वो कुछ पहचान रहा है… या याद कर रहा है।
Rahul: “Veer! बात क्यों नहीं कर रहा?”
Veer (धीरे से):
“बस यहीं रुको… अभी सब पता चल जाएगा…”

Part 9 – रहस्य की किताब और जागती शक्ति
स्थान: महल का हॉल और बाकी परिसर
समय: रात – महल में प्रवेश के बाद
दरवाजे अपने आप बंद हो चुके थे। सभी थोड़ा डरे हुए थे लेकिन थकान और भूख ज़्यादा हावी थी।
Rahul: “Veer… ये क्या जगह है? तुम कुछ जानते हो क्या?”
Veer (थोड़ा झुंझलाकर):
“मुझे क्या पता यार! मुझे लगा शायद यहां कुछ खाने को मिल जाएगा… या कोई रास्ता बाहर जाने का…”
Veer धीरे-धीरे चलकर एक साइड में बनी पुरानी सी किचन की ओर इशारा करता है।
सभी उसके पीछे जाते हैं।
Scene: महल की पुरानी रसोई
मिट्टी की दीवारों और पुराने बर्तनों से भरी रसोई में कुछ चीजें अब भी मौजूद थीं।
-
- एक कोने में कुछ फल पड़े थे – अमरूद, बेर जैसे।
-
- एक स्टील की टोकरी में थोड़े मांस के टुकड़े और कुछ अंडे बचे थे।
-
- एक पुराना चूल्हा भी था, और लकड़ियाँ वहीं रखी थीं।
Pragya, Neha और Kriti खाने की तैयारी में लग जाती हैं।
Kriti:
“कम से कम पेट भरने लायक कुछ तो मिल गया…”
Scene: महल की खोज शुरू होती है
बाकी के 6 लड़के महल के अलग-अलग हिस्सों की तरफ निकलते हैं।
Mayank और Arjun एक गलियारे से होकर Library Room में जाते हैं।
कमरा धूल से भरा, लेकिन अंदर लकड़ी की बड़ी अलमारी में सैकड़ों पुरानी किताबें।
Mayank (देखते हुए):
“इतनी दूर जंगल में लाइब्रेरी? और ये सब किताबें किसकी?”
तभी ऊपर से एक किताब खुद-ब-खुद गिरती है।
Thudd!
दोनों चौकते हैं।
वो किताब खुल जाती है और उसके अंदर दोनों ओर से दो डरावने नुकीले नाखूनों वाले हाथ बने होते हैं — जैसे किसी ने किसी आत्मा को किताब में बंद कर रखा हो।
Arjun (घबरा कर):
“ये क्या है यार… ये तो कोई शापित किताब लगती है।”
Mayank: “चल, इसको सबको दिखाते हैं।”
Scene: सब हॉल में इकठ्ठा होते हैं
अब सब खाने के लिए हॉल में आ गए हैं।
एक बड़ा सा पत्थर का टेबल और आसपास पत्थर की कुर्सियाँ।
मिट्टी की प्लेटों में खाना परोसा गया है।
सभी बैठ कर खाने लगते हैं।
तभी Mayank और Arjun वो अजीब किताब लेकर आते हैं।
Neha:
“ये कहाँ से लाई?”
Arjun:
“Library से… खुद गिरकर खुली थी… और अंदर ये देखो…”
वे किताब खोलते हैं।
किताब के दोनों ओर वही भयानक नाखूनों वाले हाथ बने होते हैं।
बीच में एक पुरानी, अनजानी भाषा में टाइटल लिखा होता है।
Kriti (पढ़ने की कोशिश करती है):
“ये तो… कोई भाषा भी समझ नहीं आ रही…”
तभी… अचानक किताब से हल्की आवाज़ आती है
जैसे सूंघने जैसी।
सभी चौंक जाते हैं… लेकिन कोई कुछ समझ नहीं पाता।
असल में… रसोई में बना मांस जब से सामने आया,
किताब में बंधी आत्मा की भूख जाग चुकी थी।
Scene: किताब और Veer का जुड़ाव
Veer एक कोने में चुप बैठा होता है।
तभी उसकी नज़र किताब पर पड़ती है।
वो अचानक उठता है… किताब की ओर बढ़ता है…
और किताब के ऊपर उंगली रखते ही उसके मुँह से एक अजीब भाषा निकलने लगती है — जिसे कोई समझ नहीं पाता।
“श्राह-काल-गानम विष्तार अधो-अन्तः जाग्रति…”
किताब खुद-ब-खुद खुलने लगती है…
उसके अंदर की इबारतें चमकने लगती हैं…
और कमरे का तापमान अचानक गिर जाता है।
Neha (डरते हुए):
“Veer… तुम्हें ये भाषा कैसे आती है…?”
Veer (धीरे-धीरे):
“…मुझे नहीं पता… पर ऐसा लग रहा है… जैसे ये… मेरी ही भाषा है…”
Part 9A – रात की परछाइयाँ और डरती सुबह
स्थान: महल के हॉल और अलग-अलग कमरे
समय: चौथे दिन की रात
Scene 1 – थकान और सुकून
सभी महल घूमकर लौट आते हैं।
Library, Mandir, Locked Basement – हर जगह एक अनकहा डर छुपा था… पर भूख और थकावट ज़्यादा भारी थी।
Sonal:
“चलो यार अब कुछ खा लेते हैं… अब और नहीं घूमना…”
Pragya:
“आज बहुत दिन बाद पेट भर खाना मिलेगा।”
सभी हॉल में पत्थर के टेबल के आसपास बैठते हैं।
फल, अंडे, और मसालेदार मांस के साथ बना खाना सब चुपचाप खाने लगते हैं।
थकावट इतनी थी कि कोई ज़्यादा बात भी नहीं कर रहा।
जल्दी-जल्दी खाना खत्म होता है… और सब अपने-अपने कमरों की ओर निकल जाते हैं।
Scene 2 – रोमांस और डर का टकराव
Room: Rahul & Aanya (his girlfriend)
कमरे में एक पुराना लकड़ी का पलंग है, दीवारों पर जालें, लेकिन माहौल शांत।
Aanya (धीरे से):
“Rahul… कहीं हमने यहां आकर कोई गलती तो नहीं कर दी?”
Rahul (उसके बालों में हाथ फेरते हुए):
“बस 10 दिन… जैसे भी हों, कट जाएंगे। फिर सब ठीक होगा, हमारी ज़िंदगी भी…”
धीरे-धीरे दोनों करीब आने लगते हैं…
बातों से शुरू हुआ सुकून, अब एक रोमांटिक एहसास में बदल जाता है।
Soft fade-out – कैमरा बाहर खिसकता है, पर अंदर उनके बीच एक प्यार भरा पल बन रहा होता है।
Scene 3 – Veer का डर
Room: Veer & his girlfriend Meenal
Meenal उसे पकड़ कर बैठी है, लेकिन Veer का चेहरा शांत नहीं…
Veer:
“मैंने… किसी लड़की की चीख सुनी थी… बार-बार… जैसे कोई मदद मांग रहा हो…”
Meenal:
“ये सब तुम्हारे दिमाग का खेल है Veer… थके हो… बस सो जाओ…”
Veer अब भी कुछ देख रहा है –
छत से उलटी लटकी हुई परछाइयाँ… दीवार पर चलती छायाएँ…
Meenal उसे अपनी बाहों में भरती है।
धीरे-धीरे उसे सुला देती है।
Scene 4 – अनजाना स्पर्श
Room: Kriti & Sonal
दोनों सो रही होती हैं।
Sonal की टाँगें चादर के बाहर होती हैं।
तभी कोई उसके पाँव को धीरे से छूता है।
Sonal (आँख बंद रखते हुए, हल्की मुस्कान):
“Kriti… तू अभी भी जाग रही है?”
कोई जवाब नहीं…
थोड़ी देर बाद… उसे एहसास होता है कि कोई उसके पूरे शरीर पर हाथ फेर रहा है…
लेकिन थकावट इतनी होती है कि वो उसी एहसास के साथ गहरी नींद में चली जाती है।
Scene 5 – सुबह की राहत… या डर?
Day 5 – सुबह
सभी अब थोड़े रिलैक्स महसूस कर रहे हैं।
Breakfast में फल और चाय जैसा कुछ बना लिया जाता है।
Arjun:
“चलो यार… आज थोड़ा घूमते हैं बाहर… जंगल की हवा ले आते हैं।”
Scene: बाहर का नज़ारा
महल के चारों ओर घना जंगल।
कुछ दूर चलते ही एक बहती हुई झरना जैसी छोटी नदी (leak) दिखती है।
Neha:
“क्या शानदार जगह है… यहाँ तो कोई फिल्म शूट हो सकती है!”
सब खुशी-खुशी पानी में उतरते हैं –
कुछ मस्ती कर रहे होते हैं, कुछ नहा रहे होते हैं।
पहली बार सब हँसते हैं…
तभी…
Scene: हमला पानी के अंदर से
Sonal (चिल्लाकर):
“मुझे कुछ खींच रहा है…! Help! नीचे कुछ है…!”
सब तुरंत बाहर भागते हैं। Rahul और Veer उसे बाहर खींच लेते हैं।
Sonal काँप रही होती है:
Sonal:
“कल रात भी… मुझे ऐसा लगा था… कोई मुझे छू रहा था… बहुत अजीब था…”
Meenal (Veer की गर्लफ्रेंड):
“Veer भी बहुत डर गया था कल… उसकी आंखें खुली थीं, लेकिन जैसे किसी trance में था…”
Aanya (Rahul की गर्लफ्रेंड):
“अब बहुत हो गया… हमें यहां से निकलना चाहिए…”
अंतिम दृश्य:
जंगल की गहराई से फिर वही धीमी आवाज़ आती है…
जैसे कोई सांस ले रहा हो…
या कोई बहुत पास छुपा हो…
Part 10 – लाइब्रेरी का दरवाज़ा और गिरती किताब
स्थान: महल के बाहर – सुबह
समय: पाँचवें दिन की सुबह, सभी थोड़ा हल्का महसूस कर रहे थे
Scene 1 – निकलने की योजना
Rahul (जोश में):
“अब बस! हम बहुत रुक चुके। चलो सब सामान उठाओ और यहां से निकलते हैं।”
Neha:
“हाँ! हमारे घरवाले तो अब तक पुलिस में रिपोर्ट भी कर चुके होंगे!”
Veer (थोड़ा चुप):
“…मैं भी यही सोच रहा था… यहाँ जो भी है, ठीक नहीं है…”
Sonal:
“तो देर किस बात की? चलो!”
सभी तेजी से महल की ओर भागते हैं, जहाँ उनके बैग, फोन, और बाकी सामान रखा हुआ था।
Scene 2 – Library का रहस्यमयी दरवाज़ा
जैसे ही वे महल में प्रवेश करते हैं, एक गूंजती हुई “धड़धड़-धड़धड़” की आवाज़ आती है…
Library का दरवाज़ा –
अपने आप धीरे-धीरे खुलता है… फिर बंद होता है… फिर फिर से खुलता है…
Aanya (डरी हुई):
“ये… ये दरवाज़ा अपने आप चल कैसे रहा है?”
Mayank:
“इससे पहले ऐसा नहीं हुआ था… ये खुद हमें बुला रहा है क्या?”
Sonal:
“नहीं यार, छोड़ो… सामान लेकर निकलो!”
Scene 3 – Rahul की जिज्ञासा
Rahul (रुककर बोलता है):
“एक सेकंड… अगर दरवाज़ा खुद खुल रहा है तो शायद अंदर कुछ ऐसा हो… जो हमें रोकना चाहता है… या बताना चाहता है…”
Veer:
“…चलो… देख लेते हैं। जो होगा, एक बार में जान लेंगे…”
सभी थोड़े डरते हुए… Library की ओर बढ़ते हैं।
दरवाज़ा अब पूरी तरह खुल चुका है।
Scene 4 – Library के अंदर
कमरे में घना अंधेरा था, बस खिड़की की दरार से हल्की धूप आ रही थी।
सैकड़ों पुरानी किताबें…
हर जगह धूल और जाले…
Neha (धीरे से):
“ये जगह… हमेशा इतनी डरावनी क्यों लगती है…”
सभी अंदर कदम रखते हैं।
कदमों से धूल उड़ती है।
तभी…
Scene 5 – किताब का गिरना
“ठाक!”
एक पुरानी भारी किताब ऊपर से नीचे गिरती है।
सभी चौंकते हैं।
Sonal:
“किताब खुद गिर गई…”
Arjun:
“कहीं ये वही किताब तो नहीं…”
Rahul (किताब की ओर बढ़ता है):
“नहीं… ये दूसरी है…”
किताब की जिल्द चमड़ी जैसी लगती है,
और उस पर एक अजीब सी आकृति बनी होती है –
जैसे दो आँखें हों… जो उन्हें घूर रही हों…
Kriti:
“इसे मत छूओ… इस जगह की हर चीज़… कुछ न कुछ कहती है।”
Veer (धीरे से):
“…रुको… मुझे इसे पढ़ना है…”
Scene 6 – नई किताब और अनजान भाषा
Veer किताब उठाता है।
जैसे ही वो उसे खोलता है…
एक ठंडी हवा चलती है,
Library की सभी किताबें हल्का-हल्का कांपने लगती हैं…
Veer (धीरे-धीरे):
“…ये वही भाषा है… जो मैंने पहले सुनी थी…”
किताब के पन्नों पर काले रक्त जैसे अक्षर उभरते हैं।
Veer उसे पढ़ना शुरू करता है…
“Tāntrik Agnā – Aatma Balidān Vidhi…”
Veer जैसे ही रहस्यमयी किताब को छूता है,
वो किताब अपने आप खुल जाती है।
अंदर से अचानक तेज़ काला धुआं निकलता है,
जैसे किसी ने सदियों से बंद एक भूतिया आत्मा को आज़ाद कर दिया हो।
धुएं के साथ आती है एक डरावनी, गूंजती हँसी:
“हहहहहहहहह… स्वाहा… बलिदान शुरू…”
सभी चौंक जाते हैं। Library की दीवारें हल्के-हल्के कांपने लगती हैं।
किताब के चारों ओर हवा का एक भंवर बनने लगता है।
Scene – आत्मा का हमला
काला धुआं अब आकार लेता है –
एक छाया जैसी शक्ल… बड़े पंजे, लंबी उंगलियाँ, आँखें नहीं – बस अंधेरा।
वो सीधा Sonal की ओर बढ़ता है –
उसी लड़की की ओर, जिसे रात को किसी ने छुआ था।
Sonal (डरी हुई चीखती है):
“रुको!!… ये… ये क्या है!!”
पर कोई कुछ कर ही नहीं पाता –
वो धुएं जैसी आत्मा उसे हवा में उठा लेती है…
और पल भर में –
“शूंऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ…”
वो गायब हो जाती है…
Sonal… ग़ायब…!!
Scene – Veer का पॉज़ेशन
Veer अब किताब के सामने खड़ा कांप रहा है।
उसकी आँखें पूरी तरह लाल और काली हो चुकी हैं।
वो किसी अनजानी भाषा में बड़बड़ा रहा है:
“बलिदान… प्रथम पूर्ण… द्वितीय आरंभ…”
सभी डर के मारे हिल तक नहीं पा रहे।
Scene – Rahul का सामना
Rahul हिम्मत करता है।
वो Veer की ओर दौड़ता है और उसके हाथ से वो किताब छीन लेता है।
Rahul (गुस्से में):
“बस बहुत हुआ!”
वो किताब को जोर से बंद करता है,
और उसे दूर दीवार की ओर फेंक देता है।
Part 11 – यादों की दरार और सच की परछाईं
Scene 1 – भूत गायब… डर बाकी
Library में एक अजीब-सी चुप्पी है।
Sonal गायब हो चुकी है।
Veer बेहोश ज़मीन पर पड़ा है।
सभी के दिलों में सैकड़ों सवाल हैं।
Kriti (कांपती हुई):
“उस किताब में क्या था?”
Mayank:
“Veer वो भाषा कैसे जानता है?”
Aanya:
“क्या हम भाग जाएं यहां से?”
Rahul:
“और Sonal को यूं ही छोड़ दें?”
Scene 2 – Veer को होश आता है
कुछ देर बाद Veer की साँसें तेज़ चलती हैं…
वो धीरे-धीरे होश में आता है।
उसके चेहरे पर पसीना, आँखें हल्की लाल… वो बैठने की कोशिश करता है।
Neha (दौड़ती है):
“Veer!! तुम ठीक हो?”
Mayank (गुस्से में):
“ठीक? हम सब मरने के कगार पर हैं!”
Scene 3 – सवालों की बौछार
सभी एकसाथ बोल पड़ते हैं:
-
- “तू वो भाषा कैसे जानता था?”
-
- “तू हमें फँसाने लाया था क्या?”
Veer कुछ नहीं कह पाता। उसके चेहरे पर डर और उलझन है।
वो उठकर दीवार की तरफ देखता है, जहाँ Sonal आखिरी बार हवा में उठी थी।
Veer (धीरे से):
“…मैंने उसे नहीं ले जाया… मैंने कुछ नहीं किया…”
Rahul (गुस्से से):
“बकवास बंद कर… बता सच्चाई क्या है!”
वो Veer को एक ज़ोर का थप्पड़ मारता है।
“थप्प!”
Veer ज़मीन पर गिरता है।
Part 12 – “Veer की यादें और महल का सच”
Scene – Library में सभी चुप हैं… Veer धीरे-धीरे बोलने लगता है:
Veer (धीरे से, डरा हुआ, पर सच्चाई स्वीकार करते हुए):
“शायद ये सब कुछ मेरी वजह से हुआ है…”
सभी चौंक कर उसकी ओर देखने लगते हैं।
Veer:
“वो दिन याद है… जब हम कैंटीन में बैठे थे?
उसी वक़्त वो पुरानी बस आई थी,
जिस पर लिखा था – ’10 दिन जंगल में बिताओ और जीतों ₹10 करोड़’
…और बस के ऊपर जो फोटो था…
वो महल… यही महल था!”
Scene – Veer का सपना और संकेत
Veer (धीरे-धीरे याद करता है):
“उस रात जब मैंने वो पोस्टर देखा,
उसी रात मुझे सपना आया था।
एक लड़की रो रही थी… उसकी आवाज़ मेरे कानों में गूंज रही थी।
और मुझे यही महल दिखा था… लेकिन तब लगा कि बस एक सपना है।”
Aanya:
“क्या? मतलब तूने पहले से देखा था ये?”
Veer:
“हाँ… और जब हम जंगल में आए,
मुझे हर जगह कुछ न कुछ जाना-पहचाना लग रहा था।
जैसे कोई मुझे बुला रहा हो… मुझे किसी खास दिशा में ले जा रहा हो…
और शायद… वही रास्ता मैंने तुम्हें भी दिखाया।”
Scene – आत्मा की पकड़ और Veer की बीती ज़िंदगी
Veer की आवाज़ भारी होने लगती है… वो ज़मीन पर बैठ जाता है… आँखें बंद करता है…
Veer:
“जब मैंने उस किताब को छुआ…
मैं जैसे… किसी और समय में चला गया…
मुझे सब दिखने लगा…
मेरा बचपन… मेरे लोग… मेरी फैमिली… ये सब…”
Flashback Begins – 20 साल पहले का वही महल
महल चमक रहा है, दीवारें साफ, हर कोने में रौशनी।
Veer एक छोटा बच्चा है, गोदी में उसकी बहन।
उसके दादा, दादी, माँ-पिता, और एक प्यारी सी बहन…
सब हँसते हुए आँगन में बैठे हैं।
Veer (बोलता है):
“वो मेरे दादा जी की हवेली थी…
पापा, मम्मी, और मेरी एक छोटी बहन थी – बहुत प्यारी थी वो।
हम सब एक साथ हँसी-खुशी रहते थे।”
Twist Begins – Uncle का छिपा प्यार
Veer:
“मेरे पापा के छोटे भाई – यानि मेरे चाचा –
वो मुझसे बहुत प्यार करते थे।
लेकिन एक दिन, पापा ने उनका रिश्ता तय करने का फैसला किया…
…और तब चाचा बहुत परेशान हो गए।”
Aanya:
“क्यों?”
Veer:
“क्योंकि… वो पहले से ही किसी और लड़की से प्यार करते थे…
और पापा उस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करते।”
Flashback continues…
Veer का चाचा, रात को अकेले बैठा सोचता है –
“अब क्या करूँ? भाई से कैसे कहूँ?
अगर उन्हें पता चला कि मैं एक सामान्य लड़की से प्यार करता हूँ…
तो वे मुझे त्याग देंगे।”
Part 13 – गाँव की लड़की और टूटता विश्वास
Flashback – रात का समय, महल का आँगन
महल के खुले आँगन में लकड़ी की कुर्सियों पर दो भाई बैठे हैं —
Veer के पिता और उनके छोटे भाई – Veer के चाचा।
टेबल पर देसी शराब की बोतल और दो गिलास रखे हैं।
चारों ओर चाँदनी फैली है… और दोनों भाई मदहोश होकर बातें कर रहे हैं।
Scene – सच्चाई सामने आती है
Veer के पिता (मुस्कुराते हुए):
“अबे तू इतनी लड़कियाँ देखकर भी एक पसंद नहीं कर पा रहा…
कहीं कोई बात तो नहीं छुपा रहा?”
Veer के चाचा (शराब के नशे में, थोड़ी देर चुप रहकर):
“…भाई… एक बात कहूँ?”
Veer के पिता:
“बिलकुल! आज बता दे जो भी दिल में है।”
Veer के चाचा (आँखें झुकाकर):
“मैं… गाँव की एक लड़की से प्यार करता हूँ…
बहुत करता हूँ…
उसे ही अपनी पत्नी बनाना चाहता हूँ… लेकिन…
मैं डरता था कि आप मना कर देंगे।”
Veer के पिता (हँसते हुए):
“अबे पगले! इसमें डरने की क्या बात है?
अगर तू उससे सच में प्यार करता है तो कल उसके परिवार को बुला ले।
मुझे कोई ऐतराज़ नहीं…
बस एक बार मैं खुद मिल लूँ… फिर सब ठीक।”
Veer के चाचा (आश्चर्य से):
“सच में… आपको कोई आपत्ति नहीं?”
Veer के पिता:
“बिलकुल नहीं… भाई तू खुश रहेगा तो मैं भी खुश रहूँगा।”
Scene – दोनों भाई गले लगते हैं
दोनों गले लगते हैं।
Veer का चाचा भावुक हो जाता है।
Veer (नैरेशन में):
“वो रात मेरे चाचा की ज़िंदगी की सबसे सुकूनभरी रात थी…
उसे लग रहा था कि अब सब अच्छा होगा…
Part 14 – “खुशियों की शुरुआत… और चाँदनी की परछाईं”
Scene 1 – अगली सुबह
अगली सुबह, जैसे ही सूरज की किरणें खेतों पर गिरती हैं,
Veer के चाचा गाँव के उस कच्चे रास्ते पर चलकर
उस लड़की के घर पहुँचते हैं।
दरवाज़ा खुलते ही लड़की की माँ और पिता उन्हें देख चौंक जाते हैं।
Veer के चाचा (मुस्कुराते हुए):
“खुशखबरी है… भाई साहब शादी के लिए मान गए हैं।”
लड़की की आँखों में आंसू आ जाते हैं।
वो भागकर अंदर से अपनी माँ को बुलाती है।
खुशी की एक लहर उस टूटे से घर में दौड़ जाती है।
Scene 2 – गरीबी में भी गरिमा
लड़की के माता-पिता झिझकते हुए कहते हैं:
लड़की के पिता:
“पर… हम इतने अमीर नहीं हैं… वहाँ कैसे आएँगे?”
Veer के चाचा ने पहले ही सब सोच रखा था।
वो एक नया सूट, लड़की के लिए साड़ी, और कुछ गहने निकालकर उनके सामने रखते हैं।
Veer के चाचा:
“आपको कुछ सोचने की जरूरत नहीं है… अब आप हमारे अपने हैं।”
Scene 3 – शाम का मिलन
शाम को लड़की अपने माँ-बाप के साथ महल पहुंचती है।
Veer के माता-पिता, दादा-दादी, सब मौजूद होते हैं।
बड़े भाई (Veer के पापा) लड़की को देखते हैं —
सीधी, सादगी भरी, पर आत्मविश्वासी।
होंठों पर हल्की मुस्कान और आँखों में शरमाहट।
Veer के पिता (मुस्कुराते हुए):
“अगर मेरे भाई को पसंद है… तो हमें भी पसंद है।”
Veer की माँ (लड़की का हाथ पकड़ते हुए):
“अब तुम हमारी बेटी हो…”
लड़की की माँ की आँखों से खुशी के आँसू बहते हैं।
Scene 4 – मुहूर्त और पहली फिकर
अगले दिन महल में पंडित बुलाया जाता है।
शादी की तारीख निकालने की तैयारी होती है।
Veer, जो उस समय 5-6 साल का बच्चा था, एक कोने में बैठा सब देख रहा होता है।
पंडित बहुत सारे पंचांग पलटने के बाद कहता है:
पंडित:
“इस समय शादी के लिए एक ही श्रेष्ठ मुहूर्त है… 15 दिन बाद, पूर्णिमा की रात।”
सभी खुश हो जाते हैं, पर…
Veer के पिता थोड़े गंभीर हो जाते हैं।
वो सोचते हैं —
“पूर्णिमा की रात… तांत्रिकों की शक्तियाँ भी उसी दिन जागती हैं…“
Veer के पिता (धीरे से):
“कहीं… कुछ तो अजीब है…”
लेकिन फिर वो सबको देखकर मुस्कुराते हैं।
“शायद मैं ज़्यादा सोच रहा हूँ।”
Part 15 – “शादी, चाँदनी… और काली छाया”
Scene 1 – शाही शादी और खुशियों की बारिश
शादी का दिन था…
महल सजा हुआ था जैसे किसी राजा की बारात निकल रही हो।
Veer के चाचा की बारात पूरे गाँव में धूमधाम से निकली।
बैंड, बाजा, और रोशनी से सजा हर रास्ता…
पूरा गाँव आमंत्रित था…
लोग कह रहे थे:
“ऐसा खाना तो कभी शादी में देखा ही नहीं… ये तो राजा-महाराजाओं जैसा लग रहा है।”
चारों ओर रौनक थी…
Veer के पिता, माँ, दादा-दादी सभी मुस्कुरा रहे थे।
और Veer का चाचा, आँसू भरी आँखों से अपने बड़े भाई से गले लग रहा था।
“भाई… मेरा सपना पूरा कर दिया आपने…”
Scene 2 – पूर्णिमा की रात और सुहागरात
चाँद अपनी पूरी चमक के साथ आसमान में फैला था।
पूरा महल चाँदनी से नहाया हुआ था।
Veer के चाचा और उनकी नई दुल्हन अपने कक्ष में थे।
सभी रिश्तेदार थककर सो चुके थे।
सुहागरात थी –
प्यार, शर्म, और थोड़ी-सी घबराहट।
लेकिन जैसे-जैसे रात गहरी होती गई,
दुल्हन की आँखें धीरे-धीरे बदलने लगीं… उसकी घबराहट अब एक छुपी हुई चालाकी में बदलने लगी।
Scene 3 – आधी रात का रहस्य
रात के 2 बजे –
सभी गहरी नींद में थे।
Veer की चाची धीरे से उठती है…
साड़ी की चुन्नी को कसकर बाँधती है, और महल के नीचे वाले बंद बेसमेंट की तरफ बढ़ती है।
बेसमेंट का दरवाज़ा अपने आप खुलता है…
वहां, अंधेरे में…
एक पुराना तांत्रिक मंडल बना था।
दीवारों पर काले चित्र, और बीच में जल रही थी काली लौ।
वह लड़की वहाँ बैठ जाती है…
और एक-एक कर सबके नाम लेकर मन्त्र बोलने लगती है।
“ॐ नमः कालाय… अमुक जीव वश मं मम…”
धीरे-धीरे वो परिवार के हर सदस्य को अपने वश में करने लगी…
Scene 4 – पहला शिकार: उसका पति
सबसे पहले उसका निशाना बना — उसका पति।
उसे अपने भाई (Veer के पिता) के खिलाफ भड़काने लगी।
धीरे-धीरे उनके बीच में झगड़े शुरू हो गए…
छोटी-छोटी बातों पर बहस, शक, और कटुता।
Veer उस समय बच्चा था, लेकिन सब महसूस कर रहा था।
Scene 5 – दूसरा शिकार: दादाजी की मौत
एक रात, Veer के दादाजी उठकर पानी पीने जा रहे थे,
तभी उन्हें बेसमेंट से रोशनी और मंत्रों की आवाज़ सुनाई दी।
वो धीरे-धीरे नीचे गए…
जैसे ही उन्होंने देखा कि वो लड़की काले पुतलों से तांत्रिक क्रिया कर रही है –
पूरे परिवार के पुतले… और बीच में वो लड़की…
वो चौंक उठे!
“ये क्या कर रही है तू!! रुक… मैं अभी सबको बताता हूँ!”
जैसे ही वो मुड़े –
लड़की ने आँखें तरेरीं और हाथ उठाया।
काले धुएँ का एक झटका…
Veer के दादा की साँसें रुक जाती हैं।
Scene 6 – सुबह की त्रासदी
सुबह होते ही महल में कोहराम मच गया।
Veer के दादा जी की लाश सीढ़ियों के नीचे मिली।
सिर पर गहरी चोट, खून बह रहा था…
सभी ने सोचा —
“शायद सीढ़ी से गिर गए होंगे…”
लेकिन Veer…
चुपचाप एक कोने में खड़ा था…
उसे पता था —
Part 16 – “आँसू, धोखा और आने वाली अग्नि परीक्षा”
Scene 1 – दुःख की चादर
Veer के दादा की मौत के बाद पूरा महल शोक में डूबा था।
चारों तरफ बस एक ही बात चल रही थी:
“इतनी खुशी के बाद अचानक ये अंधेरा क्यों…?”
सभी लोग आँसू में थे… लेकिन एक चेहरा, जो सबसे ज़्यादा रो रहा था,
वो थी – Veer के चाचा की पत्नी।
वो बार-बार चिल्ला रही थी:
“बापूजी… आप हमें छोड़ कैसे गए…”
लेकिन उसकी आँखों के आँसू में एक अजीब-सा बनावटीपन था…
जैसे किसी फ़िल्म की सबसे अच्छी अदाकारी…
Scene 2 – दूसरा झटका – दादी का निधन
दादी इस सदमे को सहन नहीं कर सकीं।
दाह संस्कार से लौटते ही…
उनकी साँसें तेज़ हो गईं, हाथ काँपने लगे, और फिर… हार्ट अटैक।
Veer और उसका पूरा परिवार चीख उठा।
अब एक ही चिता पर
दादा-दादी दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।
Veer की माँ फूट-फूटकर रो रही थी।
Veer का दिल अब डर से काँप रहा था…
Scene 3 – माँ की तबियत बिगड़ती है
कुछ दिन बाद…
Veer की माँ ग़म में डूबी हुई थीं।
उन्हें तेज़ बुखार, सिरदर्द और बेचैनी रहने लगी।
वो कमरे में बिस्तर पर थीं,
धीरे-धीरे हकीकत और भ्रम में फर्क खोने लगी थीं।
कभी Veer को पहचानती थीं, कभी नहीं…
Scene 4 – साज़िश के पीछे मुस्कुराहट
उधर, Veer के पिता (बड़े भाई) घर के बाहर बैठे थे।
आँखों में चिंता और माथे पर शिकन थी।
तभी उसके छोटे भाई की पत्नी — वही नई दुल्हन — उनके पास आई।
“भाई साहब, लीजिए… चाय पी लीजिए।”
उसकी आवाज़ में मिठास थी, लेकिन चेहरे पर कुछ और ही…
वो उनके पास खड़ी रही, जैसे कुछ कहना चाहती हो।
“आप बहुत थके हुए लग रहे हैं, सब ठीक है न?”
Veer के पापा बोले:
“नहीं बेटा… कुछ नहीं। बस ज़रा सोच रहा हूँ।”
वो मुस्कुराई, लेकिन उसकी निगाहें जैसे
हर शब्द को तौल रही थीं।
Scene 5 – एक चाल
वो फिर धीरे से बोली:
“मैं एक बात कहूँ… क्यों ना हम सब कहीं बाहर घूमने चलें?
सबका मन बदलेगा, बच्चे भी खुश हो जाएँगे…”
Veer के पिता कुछ देर सोचते रहे…
“शायद ये सही रहेगा… इतने दुख के बाद थोड़ा बदलाव अच्छा होगा।”
लेकिन उन्हें नहीं पता था…
यह ‘घूमने’ का प्रस्ताव एक नई मौत की ओर पहला कदम है।
Part 17 – घूमने की साजिश या… अगला बलिदान?
Scene 1 – योजना का एलान
Veer के पिता – अब दो मौतों और पत्नी की बिगड़ती तबियत से टूट चुके थे।
एक शाम सबको इकट्ठा करके उन्होंने कहा:
“हम सब अपने कुलदेवी माँ के दर्शन करने चलेंगे।
शायद वहां जाने से सबका दुःख मिटे… और मेरे छोटे भाई की शादी भी पूरी हो सके।”
ये सुनकर हर कोई थोड़ी राहत में था…
लेकिन Veer के चाचा की पत्नी, यानी वो रहस्यमयी बहू, एकदम घबरा गई।
उसका चेहरा पलभर को सफेद पड़ गया।
Scene 2 – डर का चेहरा
Veer के पापा ने पूछा:
“क्यों बेटा, ठीक तो है ना? तुम्हें कोई आपत्ति तो नहीं?”
वो घबराई-सी हँसी के साथ बोली:
“ह-हा… भाईजी… बहुत अच्छा विचार है… हम सब जरूर चलेंगे।”
लेकिन उसके मन में तूफान था।
वो जानती थी – कुलदेवी की शक्ति उसके काले जादू के लिए सबसे बड़ा खतरा थी।
उस रात वो सो नहीं पाई।
सोचती रही…
“अगर कुलदेवी की मूर्ति के सामने मेरा काला जादू कमजोर पड़ गया तो…?
मुझे कुछ करना ही होगा…”
Scene 3 – यात्रा की शुरुआत
अगली सुबह, घर के सब लोग तैयार हो गए।
-
- Veer के चाचा (जो अब धीरे-धीरे बहू के वश में आ चुके थे)
दो गाड़ियों में सब सवार हुए,
एक ड्राइवर भी उनके साथ था।
गाड़ी हरे भरे रास्तों, पहाड़ों, और घने जंगलों को पार करती हुई आगे बढ़ रही थी।
बहू की नज़रें बार-बार पीछे खिड़की से बाहर जा रही थीं…
मानो वो कोई साया देख रही हो…
या शायद… कोई उसे देख रहा था।
Part 17A – तूफ़ान, पेड़ और एक चाल
Scene: रास्ते का जाल
दोनों गाड़ियाँ पहाड़ी रास्तों पर आगे-पीछे चल रही थीं।
-
- Veer और बाकी लोग पहली गाड़ी में थे।
-
- दूसरी गाड़ी में थे – उसका चाचा, चाची (जो अब तक सबको धोखे में रखे थी) और दो छोटे बच्चे।
रास्ता घना हो चला था। चारों ओर पेड़ और जंगल की खामोशी…
तभी एक भयानक बिजली कड़कती है 
और तेज़ हवा में एक बड़ा पेड़ सामने गिर पड़ता है – पहली गाड़ी के ठीक आगे!
ड्राइवर किसी तरह ब्रेक लगाकर गाड़ी रोकता है।
Veer:
“अरे! पेड़ अचानक कैसे गिर गया? ये तो सीधा रास्ता था…”
Scene: फँसी हुई गाड़ी
अब हालत ये थी कि…
-
- पहली गाड़ी पेड़ के इस पार फँसी थी।
-
- दूसरी गाड़ी, जिसमें चाचा-चाची और बच्चे थे – पीछे थी और रुक चुकी थी।
Veer की माँ, बहन और बाकी लोग चिंतित हो गए।
बरसात अब तेज़ हो गई थी… रास्ता फिसलन भरा… और मोबाइल नेटवर्क गायब।
Veer के पापा बोले:
“लगता है अब पेड़ हटाना पड़ेगा… लेकिन इस बारिश में?”
“अगर कोई और वाहन न आए… तो हम यहां फँस जाएंगे।”
Scene: एक चाल की पेशकश
तभी चाची (जो अब तक शांत थी) धीरे से बोली:
“भाई जी… ऐसा करते हैं…
आप लोग मंदिर की ओर बढ़ो…
हम यहीं इंतज़ार करते हैं… पेड़ हट जाएगा तो हम भी आ जाएंगे…”
बड़े भाई ने शक भरी नज़रों से देखा।
Veer का चेहरा गंभीर हो गया…
“नहीं… कोई यहीं न रुके… हम सब साथ चलते हैं।”
चाची झूठी मुस्कान के साथ बोली:
“बिलकुल… जैसा आप कहें भाई साहब…”
लेकिन तभी चाचा (जो अब पूरी तरह वश में थे) बोले:
“नहीं भाई… बच्चे और हम यहीं रहते हैं।
औरतें बारिश में नहीं जा सकतीं। आप जाओ।”
बड़े भाई थोड़े झिझके, फिर बोले:
“ठीक है… तुम लोग यहीं रुको…
हम मंदिर में जाकर पुजारी से मदद भेजते हैं।”
Veer का मन नहीं मान रहा था… पर सबकी सुरक्षा के लिए वो आगे बढ़ गए।
Part 18 – मंदिर का रहस्य और टूटता वश
Scene: मंदिर के द्वार पर मोड़
जैसे ही मंदिर आया…
मंदिर के प्राचीन द्वार पर एक अदृश्य शक्ति सक्रिय हुई।
Veer के चाचा, जो अब तक काली विद्या के वश में थे,
एक झटका खाते हैं – जैसे नींद से जागे हों!
वो चौक कर इधर-उधर देखने लगते हैं।
“मैं… मैं यहां कैसे आया?”
“ये मंदिर…? और हम यहाँ क्यों आए हैं?”
उसकी पत्नी तुरंत समझ जाती है कि अब उसका वश टूट गया है।
लेकिन वो मन ही मन सोचती है:
“कोई बात नहीं… अभी मंदिर में मत जाना,
बाहर रहकर फिर से काबू पा लूंगी…”
तभी वो बहाना बनाकर बोलती है:
“मुझे वॉशरूम जाना है… आप लोग चलिए, मैं दो मिनट में आती हूँ।”
Scene: मंदिर के अंदर – उजाला और सच
बच्चे और चाचा मंदिर के अंदर जाते हैं।
मुख्य पुजारी जी उन्हें देखकर पहचान जाते हैं।
“अरे… इतने समय बाद दर्शन देने आए हो…
और… तुम्हारे माता-पिता, दादी-दादा, और भाभी जी कहां हैं?”
चाचा थोड़ा झिझकते हैं, फिर धीरे-धीरे सब कुछ बता देते हैं…
पुजारी गंभीर हो जाते हैं।
वो कुछ मंत्र पढ़ते हैं और आंखें बंद करके मौन में चले जाते हैं।
फिर आंखें खोलते हैं और धीरे से कहते हैं:
“तुम्हारे घर पर… कोई काली छाया है।
कोई ऐसा… जो अपनों के बीच होकर भी पराया है…”
“लो, ये तावीज़ लो –
सबके गले में बाँध दो।
जिससे सच खुद सामने आ जाएगा।”
पुजारी परशादी भी देते हैं और उन्हें माता के चरणों में ले जाते हैं।
Scene: बाहर – एक और चाल
पुजारी की बातों से चिंतित चाचा जैसे ही बाहर आते हैं…
वो देखते हैं कि उनकी पत्नी मंदिर के पास खड़ी है… लेकिन अंदर नहीं आई।
वो उससे पूछते हैं:
“तुम अंदर क्यों नहीं आईं?”
वो थोड़ा झिझकती है, फिर जल्दी से बहाना बनाती है:
“वो… मैं 7 दिन तक मंदिर नहीं जा सकती… एक व्रत के कारण।”
चाचा अब होश में आ चुके होते हैं – उन्हें उसकी हरकतों पर शक होता है,
लेकिन वो कुछ नहीं कहते…
“ठीक है, चलो… घर चलते हैं।”
Scene: वापसी
अब सभी एक ही गाड़ी में बैठते हैं और घर की ओर रवाना होते हैं।
लेकिन…
अब सिर्फ बारिश का डर नहीं था…
अब घर के अंदर की असल राक्षसी ताक़त का सामना करना था।
Part 20 – “तावीज़ का असर और चुप्पी का डर”
(Kala sach ab sirf 6 din door hai…)
Scene 1: घर वापसी और नई बेचैनी
सभी लोग मंदिर दर्शन से लौटकर घर पहुँचे थे।
थके हुए थे, लेकिन मन थोड़ा हल्का महसूस हो रहा था।
सिर्फ एक को छोड़कर…
Veer की चाची – जिसकी रूह तक कांप रही थी।
रात को जब सभी लोग गहरी नींद में थे,
वो धीरे से उठकर अपने काले मन्त्रों की माला लेकर
Veer के चाचा को फिर से अपने वश में करने की कोशिश करती है।
लेकिन…
इस बार कुछ भी काम नहीं करता।
मंत्र पढ़ने के बावजूद…
वो कुछ महसूस नहीं कर पा रही थी।
तभी अचानक – Veer के चाचा की नींद खुलती है।
“इतनी रात को क्या कर रही हो?”
वो झूठ बोलती है:
“कुछ नहीं… नींद नहीं आ रही थी।”
चाचा को शक तो होता है, लेकिन वो बोलते हैं:
“कोई बात नहीं… तुम मेरे पास आकर सो जाओ।”
पर वो घबरा जाती है।
“नहीं नहीं… मैं अभी टाइम पीरियड में हूँ, पास नहीं सो सकती।”
कहकर वो सोफे पर जाकर सो जाती है।
Scene 2: तावीज़ बंधने की सुबह
सुबह होते ही…
Veer के चाचा, अब पूरी तरह होश में थे।
वो उठकर सबको पुजारी जी का दिया हुआ तावीज़ बांधते हैं।
-
- Veer

-
- Veer की बहन

-
- Veer की माँ

-
- बड़े भैया

-
- बच्चे

Veer की चाची 
जब तावीज़ की बारी आती है,
तो वो हाथ रोकती है और झूठ बोलती है:S
“मुझे मत बांधो… मैं अभी टाइम पीरियड में हूँ।”
चाचा कुछ नहीं कहते…
लेकिन उनके मन में गहरी शंका बैठ जाती है।
उन्हें याद आता है –
“मंदिर में वो नहीं गई थी…”
“तावीज़ भी नहीं बाँध रही है…”
“रात को कुछ कर रही थी…”
अब Veer के बड़े भाई को भी शक होने लगा था
कि उनके छोटे भाई की पत्नी कुछ तो छुपा रही है…
Part 21 – “छह दिन का खेल और पहली चाल”
“काली योजना का पहला शिकार कौन?”
Scene 1: चाची की काली सोच
Veer की चाची अब बुरी तरह डर गई थी।
“बस 6 दिन हैं मेरे पास… और अगर इन 6 दिनों में मैंने सब खत्म नहीं किया, तो ये तावीज़… ये मंदिर… सब मेरा काम तमाम कर देंगे।”
वो अब तय कर चुकी थी कि पहला शिकार Veer की माँ होगी।
“सबसे कमजोर कड़ी वही है… बीमार भी है… और वो तावीज़ भी पहनती है।”
लेकिन जैसे ही वो रात को उसके पास काले मन्त्रों से उस पर वार करने गई—
तावीज़ चमक उठा और उसकी शक्तियाँ बेअसर हो गईं।
वो गुस्से से काँप उठी:
“इस तावीज़ को किसी भी हाल में हटवाना होगा… नहीं तो मेरा जादू नाकाम रहेगा।”
Scene 2: चाय में ज़हर
अगली सुबह…
घर का माहौल सामान्य था।
Veer की माँ बिस्तर पर लेटी थीं।
बड़े भैया बाहर थे, Veer और बहन अपने कमरे में।
चाची चाय बनाती है… पर आज उसमें कुछ और होता है।
एक धीमा ज़हर, जो सीधे दिल की धड़कनों को अस्थिर कर देता है।
वो चाय Veer की माँ को प्यार से देती है:
“माँजी, आपकी तबियत थोड़ी ठीक लगे, इसलिए आपके लिए खास तुलसी वाली चाय लाई हूँ।”
Veer की माँ मुस्कुरा देती हैं और चाय पी लेती हैं।
कुछ ही मिनटों में…
उन्हें चक्कर आने लगते हैं, दिल की धड़कन तेज हो जाती है,
और उनका पूरा शरीर काँपने लगता है।
Scene 3: हॉस्पिटल की दौड़
Veer और उसका बड़ा भाई दौड़ते हुए माँ के कमरे में आते हैं।
“माँ!! माँ क्या हुआ?”
“माँ… आँखें खोलो!”
Veer की बहन रोने लगती है।
बड़ी जल्दी में उन्हें अस्पताल ले जाया जाता है।
डॉक्टर उन्हें ICU में भर्ती करते हैं और कहते हैं:
“इनकी हालत नाजुक है, पर हमने समय रहते इलाज शुरू कर दिया है।”
Veer की चाची दूर से ये सब देख रही थी…
“अब बचा लो, अगर बचा सकते हो… ये तो बस शुरुआत है।”
Scene 4: डॉक्टर का शक
डॉक्टर अंदर से बाहर आकर कहते हैं:
“इनकी चाय या किसी पेय में कुछ मिलाया गया था।
हम ब्लड रिपोर्ट भेज रहे हैं – इसमें जहर की पुष्टि हो सकती है।”
अब Veer का बड़ा भाई सन्न रह जाता है।
घर में किसी ने ऐसा किया है?
अब शक धीरे-धीरे अंदर घर की चारदीवारी में घुस रहा था…
Veer के चेहरे पर अब डर नहीं था…
अब था गुस्सा और जवाब तलाशने की आग।
Part-22: “शैतानी रहस्य का खुलासा – अंत की शुरुआत”
“जब नकाब हटे… और सच्चाई चीख उठी…”
Scene 1: शक, तूफ़ान और असली चेहरा
Veer की माँ अभी भी ICU में है।
Veer, उसका बड़ा भाई, और बाकी लोग घर में…
पर अब सभी की नज़रें चाची पर थीं।
बड़े भाई ने काली माता के मंदिर से वही पूजारी जी बुला लिए थे
जिन्होंने पहले तावीज़ दिए थे।
चाची तक ये बात पहुँचती है… और तभी – उसका गुस्सा फूट पड़ता है!
अचानक आसमान काला हो जाता है…
तेज़ बारिश और तूफ़ान शुरू…
गर्जन में सिर्फ़ एक डरावनी हँसी गूँजती है…
“हाहाहाहा… अब कोई नहीं बचेगा!”
वो अब अपने असली रूप में आ जाती है –
एक भयानक, विकृत चेहरा… काली आँखे, खून जैसे दाँत, उलझे बाल…
Scene 2: आतंक की रात
घर की बिजली चली जाती है।
पूरे घर में अंधेरा फैल जाता है।
सब डर के मारे एक-एक कमरे में भागते हैं।
वो सबसे पहले घर के मंदिर की मूर्तियाँ तोड़ देती है…
फिर अपनी ताकत से हवा में उड़ती है…
Veer की छोटी बहन सीढ़ियों से फिसल कर railing पर गिरती है… और मौके पर ही दम तोड़ देती है।
Veer बेहोश हो जाता है।
Veer का चाचा (जो उसके वश में था) अब होश में आता है और अपनी बीवी से पूछता है:
“क्यों कर रही हो ये सब? किसी ने तेरा क्या बिगाड़ा है?”
पर वो कुछ नहीं कहती… बस भयंकर हँसी।
तभी वह अपने पति को काँच की अलमारी पर फेंक देती है, उसके पेट और हाथ में काँच घुस जाता है।
Scene 3: पूजा बनाम शैतान
अब बारी Veer के बड़े भाई की थी…
वो उसे हवा में उठाकर दीवार पर दे मारती है।
तभी—
पूजारी जी प्रवेश करते हैं अपने साथ 3 साधुओं की टोली लेकर।
वे मंत्र पढ़ते हैं, उसे बाँधने की कोशिश करते हैं
लेकिन उसकी शक्ति बहुत ज़्यादा थी — बांधना मुश्किल था।
पूजारी को समझ आता है कि:
“इसकी ताकत किसी तंत्र से नहीं, काली किताब से मिल रही है!”
वो एक साधु को चिल्लाकर आदेश देते हैं:
“जल्दी जाओ… नीचे तहख़ाने से वो किताब लेकर आओ!“
Scene 4: अंतिम युद्ध
वो आत्मा उन्हें रोकती है।
पूजारी पर हमला करती है…
लेकिन उसी समय—
Veer को होश आ जाता है!
उसका चाचा उसे खून से भीगते हुए मदद करता है।
Veer किसी तरह नीचे जाता है, और काली किताब लेकर आता है।
वो किताब पूजारी को देता है।
पूजारी मंत्रोच्चार शुरू करते हैं…
पूरी हवेली काँपने लगती है…
काली आत्मा चिल्लाती है:
“रुको… मत पढ़ो… मैं सब बता दूँगी!!”
Part-23: “जब सच्चाई चिल्लाई – बदले की आग”
“जो लगा था राक्षसी, वो थी एक टूटी हुई आत्मा।”
Scene: हवेली में सन्नाटा – सच की गूंज
पूजारी मंत्र पढ़ रहे थे, किताब से डरावनी काली आत्मा निकल रही थी।
सभी लोग सहमे हुए थे, हवा भारी हो चुकी थी।
Veer, उसका चाचा, बड़ा भाई — सब खड़े थे।
तभी वो आत्मा, veer की चाची, डरावनी हँसी के बाद चीखते हुए बोलती है:
“सज़ा मुझे नहीं… सज़ा दो… तुम्हारे बड़े भाई को…!”
सन्नाटा छा जाता है…
Veer चौंकता है, उसका चाचा और बड़ा भाई स्तब्ध खड़े हैं।
वो फिर कहती है — अब आवाज़ में रोष कम, दर्द ज़्यादा था:
“पूछो उससे…
पूछो तुम्हारे बड़े भाई से…
उसने मेरी बहन के साथ क्या किया था…!!”
Veer – हक्का-बक्का देखता है।
बड़ी काली आत्मा अब दर्द से काँपती आवाज़ में बताती है:
“मेरी बहन…
एक सीधी-सादी लड़की…
तुम्हारे घर में रसोई करने आती थी।
हर रोज़ तुम्हारा बड़ा भाई उसे गंदी नज़रों से देखता था।
और एक दिन… घर में कोई नहीं था।
उसने मेरी बहन को रुकने को कहा… और…
उसका बलात्कार किया…“
Veer का चाचा झटक के पीछे हटता है।
“एक बार नहीं…
बार-बार… वो रोती रही…
गिड़गिड़ाती रही…
लेकिन उस जानवर को दया नहीं आई।
यहाँ तक कि जब मेरी बहन मर गई…
तब भी उसने उसे बेजान लाश बनाकर… नीचे के तहख़ाने में… घसीट कर… फिर बलात्कार किया…“
सन्नाटा… और सिहरन
Veer की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।
“और फिर… ताकि कोई जान न सके…
उसे खेतों में गाड़ी में डालकर फेंक दिया।”
अब तक सबका सिर नीचे था…
“मैंने अपना सब कुछ खो दिया…”
“मेरे माँ-पापा ने हार मान ली थी।
लेकिन हम नहीं जानते थे कि ये सब किसने किया।
पता तब चला जब मेरी सहेली… तुम्हारे ही घर सफ़ाई करने आई…
तहख़ाने में उसे मेरी बहन की पायल और कंगन मिले…
और उसने मुझे दिए…”
वो अब ज़ोर से चीखती है:
“मैंने उसी दिन तय किया…
मैं काली शक्तियों से जवाब लूँगी।
और एक-एक को खत्म करूँगी…
इस हवेली के हर दरवाज़े को…
मेरी बहन का न्याय दिलवाऊँगी।”
Scene: Veer फूट-फूट कर रोता है
Veer गिर कर बैठ जाता है…
उसकी आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे।
“भाई… तुमने ये कैसे कर दिया…”
बड़ा भाई अब बिल्कुल चुप था। उसका चेहरा पीला पड़ गया था।
पुजारी किताब बंद करते हैं
पूजारी कहते हैं:
“इस आत्मा ने जो किया वो गलत था…
लेकिन जो इसके साथ हुआ…
वो पाप था… अक्षम्य पाप…“
एक आत्मा की विदाई
पूजारी फिर से किताब खोलते हैं।
आत्मा कहती है:
“अब मेरा बदला पूरा हुआ…
मैं जा रही हूँ… लेकिन मेरी आत्मा तब तक चैन से नहीं सोएगी
जब तक उसे कानून से सज़ा नहीं मिलेगी।”
किताब से आग की लपटें निकलती हैं…
और वो आत्मा हमेशा के लिए काली आग में समा जाती है।
Part-24 – “भूतकाल की परछाई”
महल के हॉल में धुंधली रोशनी में बैठे सभी लोग एकटक वीर को देख रहे थे। कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था। वीर की आंखों में अभी भी डर और दर्द की हल्की परछाई थी। उसने गहरी सांस ली और बोलना शुरू किया:
“जब मैंने वो किताब छुई… तो कुछ पल के लिए मेरी सांसें जैसे थम गईं… और मेरी आंखों के सामने वो ज़िंदगी घूमने लगी जो मैंने कभी जी थी… मेरा पुराना जन्म… मेरी असली पहचान…”
सभी चौंक गए। राहुल ने तुरंत पूछा, “मतलब…? तू क्या कह रहा है वीर? तू इस महल को पहले से जानता है?”
वीर ने धीरे से सिर हिलाया। “हाँ… ये महल, ये गलियाँ, ये दरवाज़े… सब मेरे हैं। ये मेरी पुरानी ज़िंदगी का हिस्सा हैं। और ये किताब… ये वो दरवाज़ा है जो उस समय को आज से जोड़ती है।”
उसने आगे कहा, “इस महल में मैं ही था… मेरा परिवार, मेरे दादा-दादी, माँ-पिता, और मेरी एक बहन… बहुत प्यार करने वाला परिवार था। लेकिन मेरी ही वजह से… सब खत्म हो गया। मेरी एक गलती ने सबको मौत के अंधेरे में धकेल दिया।”
“क्या तू कहना चाह रहा है कि ये सब जो हो रहा है… सोनल का गायब होना… वो किताब… ये सब उसी पुराने जन्म से जुड़ा है?” – राहुल ने घबराते हुए पूछा।
वीर ने गंभीरता से कहा, “हाँ… और मुझे अब समझ में आ रहा है कि सोनल को क्यों ले जाया गया। वो सिर्फ एक हमला नहीं था… वो एक संदेश था।”